गुणकारी है गन्ना

लेखकः पृथ्वीराज

सर्दियों की शुरुआत से ही बाजार में गन्ने मिलने शुरू हो जाते हैं। यूं तो गन्ने के रस से तैयार गुड़ और चीनी का नियमित प्रयोग हर घर में होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गन्ना अपने मूल रूप में भी गुणों की खान है।

भारत वर्ष में समस्त उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में ईख यानी गन्ने की लम्बे परिमाण में खेती की जाती है। गन्ना 1-8 मीटर से लेकर 3-6 मीटर (6 से 12 फुट तक)ऊंचा होता है। इस पर थोड़े—थोड़े अंतराल पर गांठें होती हैं। प्रायः गन्ना जनवरी—फरवरी के महीने में बायेा जाता है और दिसंबर—जनवरी तक यह पककर काटने योग्य होता है। गन्ने का रस ताजगी और स्फूर्ती प्रदान करता है। इसे रक्तशोधक तथा रक्तवर्द्धक भी माना जाता है। गन्ने के रस में 15 प्रतिशत प्राकृतिक शर्करा तथा विटामिन ए,बी,सी पाए जाते हैं। इस लिहाज से स्वास्थ्य के लिए यह उत्तम प्राकृतिक पेय भी है। हां, यह ध्यान रखना चाहिए कि इसे हमेशा ताजा ही पीएं अनेक मर्जों की दवा है गन्ना यदि आपको आंखों की तकलीफ है। तो या तो गन्ना चूसना शुरू कर दीजिए या फिर गन्ने का रस पीजिए। दरअसल, गन्ने का रस आंखों के विकार को दूर करके रोशनी बढ़ाता है। यही नहीं गन्ने का रस शरीर के अंगों के विकास करने में सहायक है। इसके सेवन से कद भी बढ़ता है। जहां तक गुणों की बात है तो गन्ने के रस में कैल्शियम कार्बनिक लवण, लौह, मैगनीज, फॉस्फोरस आदि खनिज तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

रक्तशोधक है गन्ना
गन्ने का रस न केवल खून बढ़ाता है। बल्कि यह रक्त को साफ भी करता है। यह अनीमिया और पीलिया रोग में भी विशेष लाभदायक होता है।

गन्ने से होती है दांतों की कसरत
अनुचित आहार—विहार से आज लोगों को दांतों और मसूढ़ों की कईं तरह की बीमारियां सता रही हैं। इनमें से अधिकतर तकलीफें दांतों के सही तरीके से साफ न करने के कारण होती हैं। दरअसल, गन्ना चूसने से न केवल दांतों की कसरत होती है। बल्कि दांत तथा मसूढ़े अच्छी तरह साफ भी होते हैं।

गन्ने के अन्य प्रयोग
गन्ने का रस औंटाकर पिलाने से खांसी में लाभ होता है।
बढ़ी हुई तिल्ली में गन्ने का रस औंटाकर उसमें जरा सा जीरा, अदरक का रस, नमक और काली मिर्च मिलाकर दें। बढ़ी हुई तिल्ली तथा जिगर ठीक होगा।

दमे के रोगी को गन्ने का सीरा देने से आराम मिलता है।
शरीर में पित्त बढ़ने से यदि उल्लिटयां आती हों, तो गन्ने का रस शहद में मिलाकर पिलाएं, आराम मिलेगा।
जौ का सत्तू खाकर ऊपर से दो सौ से पांच सौ ग्राम तक गन्ने का रस पीने से पीलिया रोग दूर होता है।
गन्ने का रस नित्य प्रातः चूसने से पथरी टुकड़े—टुकड़े होकर बाहर निकल जाती है।

नोटःकिसी भी आयुर्वेदिक नुस्खे का प्रयोग करने से पूर्व अपने चिकित्सक या वैघ से अवश्य परामर्श कर लें।
(आयुर्वेदाचार्य डॉ.सुधींद्र शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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