भोले शंकर की आराधना से चन्द्रमा होंगे आप पर प्रसन्न !

पं शशि मिश्रा (ज्योतिषी)

“चन्द्रमा मनसो जातश्च “अर्थात चन्द्रमा मानव के मन का कारक हैं। कहा जाता है कि मन सही तो सबकुछ सही। भारतीय ज्योतिष शास्त्र और खगोल विज्ञान के आधार पर चंद्रमा का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है । चन्द्रमा प्रकृति में जल तत्व को संचालित करता हैं । बिना जल के जीवन का होना संभव नहीं हैं । मनुष्य के अंदर जो ब्लड हैं उसमें भी चन्द्रमा और मंगल का जुड़ाव होता हैं। ज्योतिष के हिसाब से कर्क राशि में चंद्रमा सर्वाधिक फल देता हैं। 

चन्द्रमा से होने वाले रोग 

जैसा कि हम जानते हैं कि चन्द्रमा मन का कारक हैं तो निश्चित रूप से मन से संबंधित रोग देगा। यदि जातक की जन्मकुंडली में चंद्रमा कमजोर या नीच राशि में हो अथवा राहु ,केतु ,शनि और मंगल से युति बनाले तो जातक मन से कमजोर हो जाता हैं। एंजाइटी ,डर ,पागलपन, डैंड्रफ, चर्म रोग और महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता या लिकोरिया जैसी बीमारी देता हैं। आत्महत्या करने जैसी प्रवृत्ति भी देता हैं।वहीँ जिसका चन्द्रमा मजबूत होता हैं तो वह शांत चित्त होता हैं।

रोजगार 

जिस जातक की जन्मकुंडली में चंद्रमा कर्क राशि या उच्च का होता हैं तो मनुष्य के अंदर रचनात्मक व्यक्त्वि देता हैं। दूध से संबंधित रोजगार या पानी लिक्विड, और शिक्षा से संबंधित कार्य बेहतर होता हैं।वैसे तो रोजगार कई दृष्टि के आधार पर निर्भर हैं। चन्द्रमा लिक्विड मनी का भी कारक हैं। 
यदि चन्द्रमा से मनुष्य पीड़ित हैं तो क्या करें? 

उपाय 

1) चन्द्रमा माँ का कारक हैं तो माँ की सेवा करना सबसे फलदायी होता हैं।
2) चाँदी के बर्तन में पानी पीने से भी चन्द्रमा मजबूत होता हैं। 
3) रात को पानी ज़्यादा नहीं गिराना चाहिए । अक्सर लोग रात को कपड़ा धोते हैं जिससे चन्द्रमा ख़राब होता हैं अतः रात को कपड़ा नहीं धोना चाहिए।
4) नाभि में नारियल का तैल लगायें। 
5) सावन में भोलेनाथ की आराधना सर्वाधिक श्रेष्ठ हैं। महामृत्युंजय मंत्र का जप या शिवलिंग पर दूध चढ़ाना शुभता प्रदान करेगा। शिवरात्रि के दिन विशेष रूप से यदि जातक रुद्राभिषेक करें तो चन्द्रमा की असीम कृपा होगी। 

पं शशि मिश्रा(ज्योतिषी)

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