गाजर खाएं, रोगों को दूर भगाएं

लेखकः पृथ्वीराज

सर्दियों के इस मौसम में बाजार में लाल—लाल गाजर खूब मिल रहे हैं। गाजर की गिनती ऐसी सब्जियों में की जाती है, जिनको पकाने के साथ—साथ कच्चा भी खाया जा सकता है। इसके रस में ऐसे कईं पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी हैं। इसके गुणों के बारे में आइये विस्तार से जाने।

गाजर को उसके प्राकृतिक रूप में ही अर्थात कच्चा खाने में ज्यादा लाभ होता है। इसलिए गाजर को खाघ वस्तुओं की रानी भी माना जाता है। गाजर में कैरोटीन अधिक पाया जाता है। साग—सब्जियों में गाजर का स्थान पौष्टिकता की दृष्टि से बहुत ऊंचा है। मानव शरीर को पुष्ट करने वाले सारे तत्व इसमें मौजूद हैं। रक्त की कमी को दूर करने के लिए यह परम औषधीय दवा भी मानी जाती है। गाजर में लोहे की मात्रा बहुत अधिक है और शीघ्र ही पचकर खून में जा मिलती है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि गाजर में अंडे और मांस से भी अधिक ताकत देने वाले अंश विघमान हैं। अतः विटामिन ए गाजर में अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है। हमें कच्ची गाजर उबाल कर, भूनकर, सब्जी बनाकर, मुरब्बा बनाकर, हलवा बनाकर इसका उपयोग करना चाहिए। आंखों के लिए गाजर सबसे बढि़या टॉनिक है। विटामिन ए की कमी से ही नेत्र रोग होते हैं और दृष्टि शक्ति कमजोर होती है। गाजर के उपयोग से इस कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है।

रक्त विकार में गाजर है रामबाण
रक्त में किसी तरह की खराबी होने पर गाजर खाएं या गाजर के जूस का सेवन करें। पंद्रह दिनों में रक्त साफ हो जाएगा। यह खून में क्षारों तथा अम्लों का अनुपात भी संतुलित करती है।

नेत्र रोग
दृष्टि मंदता, रतौंधी, पढ़ते समय आंखों की तकलीफ होना आदि रोगों में कच्ची गाजर खाना या इसके रस का सेवन करना बेहद लाभप्रद है। इसके प्रयोग से चश्मे का नंबर घट सकता है।

पाचन संबंधी रोगों में लाभदायक

अरुचि, मंदाग्नि, अपचन आदि रोगों में गाजर के रस में नमक,धनिया, जीरा, काली—मिर्च, नींबू का रस मिलाकर पीने से अथवा गाजर का सूप बनाकर पीने से लाभ होता है।

मूत्र संबंधी विकार दूर करे

गाजर का रस पीने से मूत्र संबंधी विकार दूर होते हैं। रक्त शर्करा भी कम होती है। गाजर का हलवा खाने से मूत्र में कैल्शियम और फास्फोरस का आना भी बंद हो जाता है।

खनिजों की खान है गाजर
गाजर में बारह आवश्यक खनिज तत्वों के साथ—साथ आयोडीन भी पाया जाता है। यही नहीं गाजर में किसी फास्फोरिक एसिड वाले पदार्थों से चार गुना फास्फोरिक एसिड भी होता है। गाजर में पोटैशियम, मैग्निशियम तथा सोडियम की भरपूर मात्रा मिलती है। जिन लोगों को रक्त संचार पूर्ण वेग से न होने की तकलीफ हो और शरीर पीला पड़ता जा रहा हो उन्हें गाजर का जूस पीना चाहिए। गाजर आंखों को गले को तथा श्वांस नली को रोगाणुओं के संव्रQमण से भी बचाती है।

बुद्धि और स्मरण शक्ति
गाजर का दूध में बना हलवा छह माह तक प्रयोग करने से स्मरण शक्ति भी बढ़ती है।

नोटःकिसी भी आयुर्वेदिक नुस्खे का प्रयोग करने से पूर्व अपने चिकित्सक या वैघ से अवश्य परामर्श कर लें।
(आयुर्वेदाचार्य डॉ सुधींद्र शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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