Saturday, May 25, 2024
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हिमालया सिस्टोन सिरप की जानकारी (Himalaya Cystone Syrup in Hindi)

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Himalaya Cystone Syrup Uses in Hindi – हिमालया कंपनी द्वारा बनाई गई हिमालया सिस्टोन सिरप एक आयुर्वेदिक दवा है। जो किडनी से जुड़ी समस्याओं के लिए उपयोग की जाती है। इसके इस्तेमाल से किडनी संक्रमण, किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) और मूत्र रोगों से राहत मिलती है। इसके अलावा भी हिमालया सिस्टोन सिरप के कई फायदे हैं, जो हम इस आर्टिकल में आगे जानेंगे। साथ ही सिस्टोन सिरप की सही खुराक, सेवन करने का उचित तरीका और सावधानियों के बारे में भी जानेंगे।

हिमालया सिस्टोन सिरप के लाभ:

  • 1. सिस्टोन सिरप गुर्दों के संक्रमण (Infection) को ठीक करने हेतु एक बेहतरीन आयुर्वेदिक दवा है। जो लंबे समय तक गुर्दों की सेहत को स्वस्थ रखने का काम करती है।
  •  2. यह सिरप किडनी फंक्शन (गुर्दे के कार्य) में सुधार करके, उसकी कार्यक्षमता में बढ़ोतरी करने का काम करती है।
  • 3. हिमालया सिस्टोन सिरप किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) के लिए एक रामबाण दवाई है। जो पथरी को तोड़कर छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित करती है। बाद में यह टुकड़े पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकाल आते हैं।
  • 4. इस सिरप का नियमित उपयोग करने से बार-बार यूरिन जाने की दिक्कत को भी कम किया जा सकता है।
  • 5. वहीं, पेशाब करते वक्त जलन या दर्द होना व खुलकर पेशाब न आने की समस्या के लिए भी हिमालया सिस्टोन सिरप एक लाभप्रद (profitable) दवाई के रूप में काम करती है।
  • 6. इस सिरप के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (body’s immunity) में भी सुधार होता है।
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Himalaya Cystone syrup की खुराक

आमतौर पर, बच्चों को भोजन के बाद आधा या एक चम्मच (2.4 – 5 मिलीलीटर) सिरप दिन में दो बार देना उचित होता है। वहीं, वयस्कों को भोजन के बाद दिन में दो बार 2 चम्मच (5 – 10 मिलीलीटर) सिरप लेना चाहिए। बुजुर्ग व्यक्ति भी इसी प्रकार सिरप का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा दवा का अधिक फायदा पाने के लिए कृपया चिकित्सक के परामर्शानुसार सिरप का सेवन करें.

हिमालया सिस्टोन (Himalaya Cystone syrup) कैसे काम करता है?

सिस्टोन सिरप में विद्यमान आयुर्वेदिक तत्व गुर्दे में मौजूद विषाक्त तत्वों को खत्म करके गुर्दों की सेहत को अच्छा रखने में मदद करते हैं। इसके साथ ही, यह तत्व गुर्दों की कार्यक्षमता को भी बढ़ाते हैं। चलिए जानते हैं, इसमें शामिल घटकों की कुछ विशेषताओं के बारे में।

पुनर्नवा-

यह आयुर्वेदिक औषधि किडनी स्टोन को डिटॉक्स (विषैले तत्वों को बाहर निकालना) करने में सहायता करती है। इससे किडनी का संक्रमण कम होने लगता है। इसके अलावा यह किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) के लिए भी काफी लाभकारी औषधि साबित है।

पाषाणभेद-

इस औषधि को आयुर्वेद में काफी उपयोगी माना जाता है। यह गुर्दे की पथरी के लिए भी एक कारगर जड़ी-बूटी है। जो पथरी को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करके पेशाब के रास्ते बाहर निकालने में मदद करती है। 

गोखरू-

इस आयुर्वेदिक औषधि को मूत्र संबंधि रोगों और पथरी की समस्या के लिए बेहतरीन जड़ी-बूटी माना जाता है। इसके अलावा यह लोगों की पाचन संबंधी समस्या को कम करने में भी मदद करती है।

नागरमोथा-

यह धान की फसल के साथ होने वाली एक तरह की खरपतवार है। जो शरीर में यूरिन की मात्रा बढ़ाकर, शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, बॉडी की सूजन को कम करने, पाचन शक्ति को सुधारने और बुखार, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द आदि में फायदेमंद साबित होती है। आयुर्वेद में भी इस औषधि को काफी उपयोगी माना जाता है।

हिमालया सिस्टोन सिरप के नुकसान

हिमालया सिस्टोन सिरप एक आयुर्वेदिक दवा है। इसलिए इसके साइड इफेक्ट्स (दुष्प्रभाव) की संभावना कम ही होती है। हालांकि, हर व्यक्ति की बॉडी अलग होती है और इस दवा के प्रभाव भी अलग-अलग होते हैं। इसलिए इस दवा का अधिक मात्रा में सेवन करना अर्थात ठीक से उपयोग न करने पर मतली (जी मिचलाना) एवं उल्टी, डायरिया (दस्त), अनिद्रा (नींद न आना) जैसे नुकसान सामने आ सकते हैं। इसलिए, इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

हिमालय सिस्टोन सिरप से जुड़ी सावधानियां:

  • 1. इसका ज्यादा सेवन न करें। अत: इस दवा का सेवन डॉक्टर के परामर्शानुसार ही करें।
  • 2. गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए इसका उपयोग डॉक्टर के दिशा-निर्देशानुसार ही करें।
  • 3. इसका सेवन केवल डॉक्टर के बताए समय तक ही करें। अर्थात हिमालया सिस्टोन सिरप का उपयोग बहुत लंबे समय तक नहीं करना चाहिए।
  • 4. दवाई को खरीदते एवं उपयोग करते वक्त उसकी समाप्ति तिथि (एक्सपायरी डेट) जरूर देखें।
  • 5. उपयोग करने से पहले सिरप के लेबल पर लिखे दिशा-निर्देशों को भली-भांति पढ़ें।
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अक्सर पूछे जानें वाले सवाल (FAQS)

अगर आप Himalaya Cystone syrup लेना भूल जाएं तो?

यदि आप समय पर हिमालया सिस्टोन सिरप का सेवन करना भूल जाते हैं। तो आपको तुरंत अपनी भूली हुई खुराक ले लेनी चाहिए। वहीं, अगर आपकी अगली खुराक का समय हो जाए, तो ऐसे में छूटी हुई खुराक को स्किप (छोड़कर) करके केवल आगे की खुराक का सेवन करना चाहिए। अत: एक वक्त पर दो खुराक नहीं लेनी चाहिए.

सिस्टोन सिरप का कार्य क्या है?

हिमालया सिस्टोन सिरप मुख्य रूप से किडनी से जुड़ी समस्याओं को कम करने और रोकने का काम करती है। दरअसल यह एक आयुर्वेदिक दवा है। जो किडनी के साथ-साथ मूत्र संबंधित रोगों को लिए भी फायदेमंद साबित होती है।

सिस्टोन कितना प्रभावी है?

हिमालया सिस्टोन सिरप का प्रभाव अर्थात असर एक से दो हफ्तों में दिखना शुरु हो जाता है। लेकिन हर व्यक्ति का शरीर एक-दूसरे से थोड़ा अलग होता है, इसलिए इस दवा का प्रभाव भी हर व्यक्ति पर विभिन्न समय अंतराल पर हो सकता है। इसके अलावा इस दवा का प्रभाव लोगों की बीमरियों की गंभीरता पर भी निर्भर करता है।

क्या हिमालया सिस्टोन सिरप को खाली पेट इस्तेमाल कर सकते है?

हां, इस दवा का उपयोग खाली पेट, खाना के साथ या भोजन करने के बाद, हर तरह से किया जा सकता है। वहीं, इसके ज्यादा अच्छे परिणामों के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।

पेशाब में पथरी क्यों बनती है?

जब लोगों के यूरिन में ऑक्सालेट, कैल्शियम और यूरिक एसिड जैसे पदार्थों का स्तर बढ़ जाता है, तो वे क्रिस्टल (crystal) का निर्माण करके गुर्दे के साथ जुड़ने लगते हैं। जो आगे चलकर एक स्टोन अर्थात पथरी का रूप ले लेते हैं। 

मुझे हिमालया सिस्टोन कब लेना चाहिए?

जब व्यक्ति किडनी स्टोन की समस्या से पीड़ित हो या इसके लक्षणों का अनुभव कर रहा हो। ऐसे में व्यक्ति को हिमालया सिस्टोन सिरप का सेवन शुरु कर देना चाहिए। वहीं, सिरप के ज्यादा बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

क्या ज्यादा पानी पीने से पथरी निकल जाती है?

ज्यादा पानी पीना पथरी निवारण का सबसे सरल, सुगम और महत्वपूर्ण उपाय है। दरअसल पानी मूत्र में मौजूद उन सभी पदार्थों को गलाने में मदद करता है, जिसके कारण शरीर में पथरी का उत्पादन अर्थात निर्माण होता है। इसलिए 8-10 गिलास पानी दिन में जरूर पीना चाहिए। क्योंकि पानी का अधिक सेवन न केवल शरीर को किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) से बचाता है, बल्कि शरीर की तमाम रोगों से सुरक्षा भी करता है।

क्या पेशाब में जलन के लिए सिस्टोन सिरप उपयोगी है?

हां, हिमालया सिस्टोन सिरप पेशाब करते वक्त होने वाली जलन, ठीक से पेशाब न आना जैसी दिक्कतों को कम एवं उपचार करने में भी उपयोगी साबित होती है।

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