Saturday, May 25, 2024
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सच्ची कहानी ‘एक जानलेवा बीमारी और भारतीय नारी’ की

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कहानी एक पेशेंट और उसकी जिद्दी पत्नी की


आज मैं आपको एक लेडी के त्याग की कहानी बताने जा रहा हूं। नहीं नहीं ये मां की कहानी नहीं है, मां तो हमेशा से ही ममता और त्याग की कहानी रही है। क्या आपने कभी किसी को ऐसे कहते सुना है की अगर मां न होती तो लाइफ सुकून की होती, मां ना होती जो चाहे वो करते, अपनी जिंदगी मजे से जीते.. नहीं ना .. लेकिन ऐसा जरूर कहते सुना होगा कि अगर शादी नही होती तो लाइफ सुकून से होती, शादी के बाद जिंदगी खराब हो गई है, मैं बंध सा गया हूं वगैरह वगैरह।

तो ये त्याग की कहानी है मेरी पत्नी “शर्मा जी” की।

मुझे लगभग 10 महीने हो चुके है एक जानलेवा बीमारी से लड़ते हुए। इस दस महीने में ना तो मैं कहीं घर से बाहर निकल सकता हूं ना मैं ज्यादा लोगो से मिल सकता हूं। तो बस एक 800 sqft के 2bhk फ्लैट में कैद। मुझे ठीक करने की इस यात्रा में मेरा सबसे बड़ा साथ दे रही है मेरी पत्नी.. जो मेरे साथ 24×7 रहती है। उसका सपना HR profession में आगे बढ़ने का था पर जैसे ही मेरे बारे पता लगा, उसने मुझे ठीक करने के लिए बिना कुछ सोचे अपना करियर, अपने सपने, एक बड़े ब्रांड की अपनी ‘वर्क फ्रॉम होम’ वाली जॉब छोड़ दिया, जहां वो बोहोत अच्छा कर रहीं थी, बोहोत खुश थी और अपने सपनो को पूरा कर रही थी।

अगर कोई बीमार व्यक्ति के साथ आप एक महीने रह लो तो आपको पता लग जाता है की कितना मुश्किल होता है। पर Ajita हर वक्त मुझको पीड़ा में देखना, मेरे लिए सब कुछ करना.. दवाई, नहलाना, हॉस्पिटल के चक्कर, रात रात भर खुद की नींद खराब करके मेरे लिए जगना, साथ ही घर के काम और इन सब से बड़ी चीज मुझे हर वक़्त मोटिवेट करना। मुझे तरह तरह की बचकानी हरकतें करके हसाना, खुद छुप छुप के रोना पर सामने वाले को पता नही लगने देना, मुझे बताना की मैं बोहोत हिम्मतवाला हूं इस बीमारी को हरा कर रहूंगा और ना जाने कितना कुछ। एक समय आने के बाद इंसान चिढ़ जाता है, थक जाता है, डेली यही करते करते। पर मेरे केस में मेरी बीवी डेली ही एक नई ऊर्जा के साथ मुझे ठीक करने में लग जाती है।

हमारी लड़ाई हमेशा इस बात पर होती है, मैं कहता हूं, “तुम मेरे साथ रह रह कर, मेरी बेकार सी बीमारों वाली शकल देख देख कर, मुझे झेल कर, बोर नहीं हो जाती हो। जाओ कहीं घूम कर आओ”.. ऐसे कई trip होते है जो मेरे परिवार वाले जाते हैं.. मैं यही कहता हूं “साथ जाओ मूड भी फ्रेश होगा अच्छा लगेगा” पर उसे मेरी एक बात नही सुननी होती, जिद्दी जो ठहरी, उसे मेरे साथ ही रहना है.. uff.. कैसे कर लेती हो तुम ये। मैं शायद तुम्हारी जगह होता तो बिलकुल नहीं कर पाता।

आज मेरी बीवी का जन्मदिन है और मैं आज मैं इस हालत में भी नहीं हूं की कुछ कर सकूँ पर वो फिर भी इतना खुश है उसे कोई फर्क नही, उसे अभी बस मेरे ठीक होने से मतलब है, बस कैसे भी और सच कहूं मैं भी आज अपनी बीमारी से इसीलिए लड़ पा रहा हूं और मैं ठीक हो कर रहूँगा | क्योंकि मुझे इतना बड़ा सपोर्ट मिला हुआ है, सपोर्ट मेरी बीवी का, मेरे परिवार का, मेरे दोस्तों का, मेरे रिश्तेदारों का जो सबको नही मिल पाता।

Happy Birthday My Ladylove ? ?
I have no words for your devotion, love and loyalty.
Thank you mujhe Jhelne ke liye ❤️
Sach me ye dil kahin lagta nhi hum kya karen ❤️
In the end, I’m sorry for always hurting you ❤️

यह सच्ची कहानी है Amit Singh और उनकी पत्नी Ajita Sharma की। हम भगवान से प्राथना करते है की अमित जी जल्दी स्वस्थ हो।

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