Friday, February 23, 2024
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जानें इरोटिका (Erotica) और पोर्न (Porn) फिल्मों में अंतर

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क्‍या होती हैं इरॉटिक फिल्‍में – Difference between Erotica & Porn Films

इरॉटिक (Erotic) का हिंदी में मतलब है कामोत्तेजक। यानी वैसा कॉन्‍टेंट जिसे देखकर सेक्‍सुअल एक्‍साइटमेंट बढ़ जाए। ऐसी फिल्‍मों या इस तरह के कॉन्‍टेंट को इरॉटिका भी कहते हैं। सरल शब्‍दों में समझे, तो कोई भी ऐसा आर्ट जिसे देखकर सेक्‍सुअल एक्‍साइटमेंट बढ़े, उसे इरॉटिका कहते हैं। यह कोई पेंटिंग हो सकती है, कोई मूर्ति, कोई फोटोग्राफी, कोई नाटक, कोई फिल्म या फिर कोई संगीत या लिटरेचर। इसे आर्ट माना जाता है, जहां आप अपने दर्शक, पाठक की सेक्‍सुअल एक्‍साइटमेंट को अपनी कला के जरिए बढ़ाते हैं। इसमें न्‍यूडिटी शामिल है। लेकिन यहां सेक्‍सुअल इंटरकोर्स यानी संभोग या सेक्‍स नहीं है। सिर्फ कला से एक्‍साइटमेंट लेवल बढ़ाने का काम है।

फिल्‍मों में इरॉटिक सीन होते हैं या पॉर्न? – Difference between Erotica and Porn Films

इसे और बेहतर ढंग से समझने के लिए हम फिल्‍मों के बोल्‍ड सीन का उदाहरण ले सकते हैं। हॉलिवुड या वेब सीरीज में ऐसे न्‍यूड सीन दिखाए जाते हैं, जिसे डायरेक्‍टर ने सेंसुअस तरीके से फिल्‍माया है। यानी वहां ऐक्‍टर्स को पूरी तरह सेक्‍स या इंटरकोर्स करते हुए नहीं दिखाया जाता है। इरॉटिका में एक कला है, वहां सिर्फ सेक्‍स की इच्‍छा नहीं है, खूबसूरती भी है। यानी इरॉटिक कॉन्‍टेंट सिर्फ हमारे सेक्‍सुअल एक्‍साइटमेंट को ही नहीं बढ़ाता, बल्‍क‍ि हमें उसकी खूबसूरती को निहारने पर भी मजबूर करता है। यह हमारी इंद्र‍ियों (सेंसेज) पर ऐसा प्रभाव छोड़ता है, जो किसी आकार या इंसान की सुंदरता की ओर भी हमारा ध्‍यान खींचता है।

फिर पोर्नोग्राफी या पॉर्न फिल्‍म क्‍या है – Difference between Erotica and Porn Films

पोर्नोग्राफी, इरॉटिका से ठीक उलट है। पोर्नोग्राफी का एकमात्र मकसद दर्शक को सेक्‍स के लिए ‘टर्न ऑन’ करना है। एक पोर्नोग्राफर और एक आर्टिस्‍ट में फर्क यह है कि आर्टिस्‍ट अपनी कला से सेक्‍सुअल एक्‍साइटमेंट बढ़ाने के साथ-साथ मन और इंद्र‍ियों पर उसकी खूबसूरती का भी प्रभाव छोड़ता है। जबकि पोर्नोग्राफी को मन और खूबसूरती के प्रभाव से कोई मतलब नहीं है। उसका सीधा मकसद से सेक्‍स के लिए एक्‍साइटमेंट बढ़ाना। पोर्नोग्राफी में सिर्फ न्‍यूडिटी नहीं है, वहां इंटरकोर्स भी दिखाया जाता है। यानी दो इंसान के बीच सेक्‍स कैसे होता है, यह भी दिखाया जाता है।

इसलिए अलग हैं इरॉटिक और पॉर्न कॉन्‍टेंट – Difference between Erotica and Porn Films

रिटायर हो चुके अमेरिकी क्‍ल‍िनिकल साइकोलॉजिस्‍ट एफ. सेल्‍टजर ने साल 2011 में इस पर एक आर्टिकल लिखा था। इसमें वह लिखते हैं, ‘इरॉटिका हमें यह समझने में मदद करता है कि हमें क्‍या एक्‍साइटमेंट देता है और क्‍या नहीं। जबकि पॉर्न फिल्‍में या फोटोज ऐसा कोई प्रभाव नहीं छोड़ते। वह सिर्फ तत्‍काल प्रभाव से सेक्‍स के लिए एक्‍साइटमेंट को बढ़ाते हैं। कोई भी किसी पॉर्न वीडियो या फोटो को बार-बार नहीं देखता, क्‍योंकि वह कला नहीं है। उसमें सेंसुअसनेस नहीं है। पोर्नोग्राफी सीधे तौर पर पैसा कमाने का जरिया है। इसमें कोई कला नहीं है। इसके साथ ही पॉर्न में औरत या मर्द की शारीरिक खूबसूरती को भी नहीं दिखाया जाता, उसका फोकस उन्‍हें एक वस्‍तु की तरह दिखाने पर होता है, जिसका मकसद सिर्फ तत्‍काल के जिए वासना यानी डिजायर को पूरा करना है।’

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